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राम की क्रांति

आप किससे शिकायत कर रहे हैं? आपको किसने रोका था मन्दिर आने वाले हिन्दू को संगठित लोकमत में बदलने

देश राष्ट्रीय जीवन रूपी जहाज है

आज से 154 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। स्वामी जी भारतीय म

व्याख्यान रामायण का

मैं तीन पोलिटिकल स्टेटमेंट दे रहा हूँ। आप सब इसका मूल्याकंन करिये कि मैं कहां तक सही हूँ। पहला इ

हवा अब भी चल रही है

फेल होना या असफल होना क्या है? हम सोचते हैं, हम फेल हैं। जैसे संसार का हर इंसान सोचता है कि वो सबसे

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

जीवन ध्येय सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा तथा श्री रामचरितमानस हमारे सम्मुख दर्पण के समान हैं ज

व्याख्यान रामायण का

धर्म सत्य  लंका काण्ड में जब विभीषण चिन्तित हो गया कि साधन विहीन रामजी साधन सम्पन्न रावण पर व

व्याख्यान रामायण का

रामजी वाल्मीकि जी से पूछ रहे हैं कि मैं कहा रहूँ। वाल्मीकि जी बता रहे हैं कि प्रभु राम किसके दिल

व्याख्यान रामायण का

सब कुछ राम जी राम की कृपा से सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी असमान्य कार्य करने में सक्षम बन जाता

व्याख्यान रामायण का

सब कुछ राम जी रामायण के अनुसार कार्यकर्ता की मनःस्थिति का इससे अधिक सुन्दर वर्णन और हो ही नहीं

व्याख्यान रामायण का

रामचरितमानस में एक प्रसंग है। हनुमानजी लंका में अद्भुत सफलता प्राप्त करके लौटे। तो शिवजी ने पा

क्रांति राम की

संकट में हिन्दू जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।। यद्यपि जग में अनेक प्रका

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

धर्म सत्ता आपको कोई तीन प्रकार की गाली दे तो उसमें सबसे अधिक चुभने वाली कौन सी होगी? पहली आप चोर

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा

जीवन लक्ष्य का साक्षात्कार किंतु ज्योहि जाम्बवंत जी के मुंह से निकला कि "हे हनुमान! तुम्हारा ज

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

जाम्बवंत की प्रशंसा जाम्बवंत जी उनकी प्रशंसा में न जाने क्या-क्या कहते हैं तो भी उनके शरीर में

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

हनुमान का आत्मविश्वास ग्रामवासी को बनना है हनुमान। सच तो यह है कि वह हनुमान तो है ही। उसे बनना

व्याख्यान रामायण का

लवकुश की भूमिका वाल्मीकि रामायण में लवकुश का बहुत मार्मिक प्रसंग है। जब अयोध्यावासियों ने सी

व्याख्यान रामायण का

वन गमन (लक्ष्मण जी) धरती की ताकत-लक्ष्मण जी रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका।। श

व्याख्यान रामायण का

वन गमन (लक्ष्मण जी) धरती की ताकत-लक्ष्मण जी लक्ष्मण जी को शेष जी का अवतार माना गया जो धरती को धा

व्याख्यान रामायण का

सीता का मानस तुलसी रामायण में सीता जी के दो प्रसंगों का वर्णन है। प्रथम तो अपनी सास में कौशल्या

व्याख्यान रामायण का

वनगमन का महत्व प्रथम राम जी कैकयी माँ से कह रहे हैं-  जौं न जाउँ बन ऐसेहु काजा। प्रथम गनिअ मोह

व्याख्यान रामायण का

देवताओं की योजना भरतु प्रानप्रिय पावहिं राजू। बिधि सब बिधि मोहि सनमुख आजू।। रामजी कह रहे है

व्याख्यान रामायण का

देवताओं की योजना तुलसी रामायण में इसी प्रसंग को एक अलग ढंग से वर्णित किया है। देवतागण रावण के अ

क्रान्ति राम की

सीता का दूसरा वनवास वाल्मीकि जी वर्णन करते हैं कि :- दुष्टमवा तु राघवः पत्नीं कल्याणेन समन्वि

क्रान्ति राम की

सीता का दूसरा वनवास  कई बार मन में प्रश्न उठता है कि इस देश में सीता जी का नाम राम जी से भी अधिक

कैसे कोई भूल सकता

भोपाल गैस हादसे की आज 33वीं बरसी है। 2 और 3 दिसंबर की रात ही झीलों का ये शहर 'यूनियन कार्बाइड' कंपनी स

क्रांति राम की

सीता का पहला वनवास लक्षणिभ्यो द्विजातिभ्य श्रुत्वाहं वचनं ग्रहे।  वनवासकृतोत्साहा नित्य

क्रान्ति राम की

सीता जी का पहला वनवास  राम जी वनवास प्रस्थान के पूर्व सबसे विदा लेते है। सबसे अंत में पहुंचते

क्रान्ति राम की

वन गमन (राम-सीता) वनवासी ही क्यों?  यह घोषणा तो रामायण में न जाने कितनी बार की गई है कि राम जी के

क्रान्ति राम की

सीता जी को खीर  अपने वनवास काल के प्रथम 13 वर्ष सब ऋषि-मुनियों से भेटकर राम जी ने ब्रह्मशक्ति को

बताओ मैं कौन हूँ

मैं भारत का रहने वाला हूँ (अपनी तऱफ से) देश की सियासत मेरे नाम से चलती है। इसकी वजह यह कि मैं देश के

क्रान्ति राम की

युद्ध में धर्म का पालन प्रायाहि जानामि रणर्दितस्वतं,  प्रविश्य रात्रिचरराज लंकाम् आश्वस्

क्रान्ति राम की

युद्ध में धर्म का पालन  युद्ध में एक ऐसा समय आता है जब रावण ने रामजी के सेना के अनेक वीरों का वध

क्रान्ति राम की

असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु। जग विस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।। वे अ

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

आज के संदर्भ में हम देखें तो वर्तमान में हमारे देश में एक धर्मयुद्ध चल रहा है। धर्म का पक्ष अर्थ

क्रांति राम की

धर्म और सत्य  सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहें न कतहुँ रिपु ताकें।। (राम जी ने कहा) हे सखे! धर

क्रान्ति राम की

धर्मयुद्ध राम की क्रांति में जहां सम्पर्क, संगठन की ताकत थी, वहीं उनका न्याय एवं सत्य पक्ष का आ

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

सुग्रीव-हनुमान ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव, हनुमान आदि वानर समाज को देखकर सीता ने अपने वस्त्र तथ

क्रान्ति राम की

प्रभु राम ने जटायु के साथ प्रेम सम्बन्ध बढ़ाया- और जटायु ने रामजी के काम के लिये अपने प्राणों की

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

जटायु प्रसंग इसका एक बहुत सटीक उदाहरण मिलता है, जटायु प्रसंग से। सीता हरण हो गया था। पंचवटी अर्

क्रान्ति राम की

निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाई पन कीन्ह। सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह।।  श्री रा

क्रान्ति राम की

निसिचरहीन रामजी को पंचवटी जाने की सलाह अगसत्य मुनि ने दी थी। स्वयं अगसत्य इसी प्रकार का जन संग

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

प्रतिकार क्षमता अंतिम लक्ष्य तो था रामराज्य की स्थापना। इसके लिए राक्षसों का संहार आवश्यक था

क्रान्ति राम की

श्री नरेन्द्र कोहली के अनुसार, राम लखन, सीता ने अपने वनवास काल में। सीता ने संभाला शिक्षा का मोर

बच्चों के दिलेर चाचा

मध्य रात्रि की वो सुखद बेला जब हम आजाद हुए थे, हमने गुलामी की जंजीरों को तोड़ा था। तब इस आजादी और

क्रांति राम की

प्रेम की गंगा किंतु प्रभु राम ने सामाजिक परिवर्तन हेतु मार्ग कौन सा अपनाया। प्रेम तथा स्नेह स

क्रान्ति राम की

पाप करत निसि बासर जाहीं। नहिं पट कटि नहिं पेट अघाहीं।। सपने हुँ धरम बुद्धि कस काऊ। यह रघुनंदन

संस्कारशाला भविष्य गढ़ने का केंद्र

कहते है मानव जीवन परोपकार के लिए होता है और उस परोपकार में अगर कोई स्वार्थ निहित नहीं होता है तो

उम्र के ठहराव पर भी परिवार के लिए गतिमान

ऊपर वाले की कुछ लिखित तकदीर पर कभी-कभी बहुत अफ़सोस होता है! जिन बूढ़े कन्धों पर परिवार के भरण-पोषण क

क्रान्ति राम की

चित्रकूट प्रसंग लेकिन राम को तो एक कदम आगे बढ़ना था। जब तक इस वनवासी समाज के जीवन स्तर में अंतर

दिन विशेष पर मेरा प्यार

कितनी खूबियां एक आदमी में होनी चाहिए प्यार जैसी महँगी चीज़ के काबिल बनने के लिए?या उसे पाने के लि

शिक्षा 

  तुलसीदास जी सबसे पहले इस शिव समाज अर्थात् देश के उपेक्षित गरीब समाज में सन्देह, अज्ञान का उल

क्रांति राम की

सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उगम सुखद सब काहू।। भाइयों सहित श्रीरामचन्द्र जी के विवाह का उत्

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

समाधान तुलसीदास जी इसका उल्लेख भी करते हैं कि सीता बहुत निराश है। कौन अपनायेगा उसे? कौन बनायेग

क्रान्ति राम की

परशुराम जी  किंतु परशुराम जी के बारे में हमें उनके इतिहास को जानना होगा। वे राम के पूर्व के अव

एकता दिवस महज जनता के लिए माहौल 

संभव है कि आप मेरी बातों से सहमत नहीं हों, पर यह सच है कि सत्ता के षड्यंत्र अबूझ होते हैं ! कई बार इ

क्रांति राम की

वर्तमान से तुलना अब हम यदि तुलना करें, तो जिन नौ कक्षणों का तुलसीदास जी ने उस समय के शिव समाज क

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

सारी पृथ्वी पर भारी हलचल हो गई। तुलसीदास जी वर्णन करते हैं कि- भरे भुवन घोर कठोर रव रबि बाजि तजि

क्रान्ति राम की

क्रान्ति की घोषणा  तो फिर राम जी ने घोषणा की कि जिसका कोई नहीं है उसी का तो बनने के लिये मैं आया

जैसे विचार होंगे दुनिया वैसी ही दिखती है

समर्थ रामदास का नाम देश के महानतम संतों में गिना जाता है। वो छत्रपति शिवाजी के गुरु भी थे। कहते

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

जनक का संताप  विश्वामित्र जी धनुष तोड़ने हेतु रामजी को जनक जी के संताप को मिटाने का आदेश देते

क्रान्ति राम की

रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।। रावन और बाणासुर ने जिस धनुष को छुआ तक नहीं और सब

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

असहाय राजसत्ता  अब ऐसे लक्ष्ण वाले समाज की जड़ता को तोड़ने का सामर्थ्य किसी राजसत्ता में हो

क्रांति राम की

समाज की जड़ता इस समाज का वर्णन करते हुये कहते हैं, कि शिव समाज अर्थात देश का उपेक्षित समाज में न

छठव्रत 

चार दिवसीय सूर्य देवता का व्रत डाला छठ (सूर्य षष्ठी) व्रत का प्रथम नियम-संयम 24 अक्टूबर, मंगलवार

क्रांति राम की

संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु। बूड़ सो सकल समाजु चढ़ा जो प्रथमहि मोह बस।। शिवजी का धनु

अन्नकूट महोत्सव

देवालयों में अन्नकूट का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचदिवसीय महापर्व का चतुर्थ पर

दीपावली

जगमग होंगे दीप- घर-घर विराजेंगे श्रीलक्ष्मी-गणेशजी घर आएंगी श्रीलक्ष्मी- जब होगी पूजा शुभ मुहू

छोटी दीपावली

नरक चतुर्दशी रूप चतुर्दशी, छोटी दीपावली (18 अक्टूबर, बुधवार) कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथ

क्रांति राम की

रूपक स्वरुप धनुष  अब तुलसीदास जी इस धनुष को एक जहाज से तुलना कर रहे हैं। जिसमें एक विशेष प्रका

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

गननायक बरदायक देव। आजु लगे कीन्हिउँ तुअ सेवा।। बार-बार बिनती सुनि मोरी।  करहु चाप गुरुता अत

क्रांति राम की

(ख) सीता जी इसकी खोज करते हैं सीताजी के कथन से। सीता जी कह रही है- मनहीं मन मनाव अकुलानी। होहु

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहिहिं टूटें धनुष सुखारे।। उदय भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे

क्रान्ति राम की

3. धनुष भंग राम सीता के विवाह की दृष्टि से जन सामान्य में यही मान्यता है कि रामजी ने शिव  धनुष क

क्रान्ति राम की

सूक्ष्म संकेत अर्थात अपना परिवार हो या शत्रु का। राम ने नारी के सम्मान पर कहीं पर भी आंच नहीं

क्रान्ति राम की

राम के व्यवहार से प्रभावित हुये बगैर भी नहीं रह पाती। रामायण कहती है। :- मंदोदरी आदि सब देइ तिल

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

साथ में अपूर्व ज्ञान प्रदत्त करते हुये कहते है। :- छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीर

राम की क्रांति 

बालि की पत्नी तारा ने बालि को सावधान करते हुये पहले से ही चेताया था। तुलसीदासजी लिखते हैं। :- सु

क्रान्ति राम की

राम नारी समाज के प्रति सम्मान को सर्वोपरि मान रहे है और फिर बाली को अपनी पत्नी की सलाह न मानने का

क्रान्ति राम की

तो राम उसे उत्तर दे रहे हैं। :- अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।। इन्हहि कुदृष

राम की क्रांति 

(घ) तारा राम ने दो वीरों का वध किया एक बाली और दूसरा रावण, लेकिन दोनों की पत्नियों के साथ राम का व्

राम की क्रांति 

युद्ध समाप्ति पर जब राजा दशरथ राम को दर्शन देने आये तब रामजी ने दशरथ जी से कैकई तथा भरत को त्याग क

क्रांति राम की

उसेक बाद मताओं में सबसे पूर्व कैकयी को प्रणाम कर उसके चरणों में लोट-पोट हो रहे हैं। रामायण कहती

राम की क्रांति 

(ग) कैकेयी कैकेयी के सम्मान के लिये तो राम ने कमाल ही कर दिया। सारा परिवार, जनता तथा दुनिया जिसको

राम की क्रांति 

तुलसी रामायण में भी वर्णन आता है युद्ध समाप्ति के बाद हनुमान जी सीतजी को रामजी की पत्नी के समान

शारदीय नवरात्र

नवरात्र में जगतजननी मां भगवती की आराधना से पूर्ण होंगे मनोरथ... महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा का

क्रांति राम की

ध्येयवाद की अग्नि तुम्ह पावक महुं करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा।। इसलिए जब तक मैं राक

क्रांति राम की

एक पत्नी व्रत  रामजी के पिता दशरथ दशरथ की तीन पटरानियां थीं। किन्तु वाल्मीकि रामायण के अनुसा

क्रांति राम की

अपदेशो में जनकान्नोत्पत्तिर्वसुधातलात्। सदाचार को मानने वाले देवता! राजा जनक की यज्ञ भूमि स

क्रांति राम की

कामं श्वश्रुर्ममैव त्वं त्वत्सकाशात् तु मैथली। कर्षता फालहस्तेन जनकेनोद्धृता पूरा।। देव

क्रांति राम की

(ख) सीता सीताजी का धरती से सम्बन्ध का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में आता है जनक जी उलके उत्पत्ति की

क्रांति राम की

अपि रामाय कथितं यद् वृतं तत् परातनम्। मम मातुर्महाते जो देवेन दुरनुष्ठितम्।। महातेजस्वी म

क्रांति राम की

अर्ताथ् राम ने नारी समाज का अह्वान किया कि तुमको दण्डित होने के लिये विधाता ने नारी नहीं बनाया।

क्रांति राम की

(क) अहल्या एक ऋषि पत्नी इसीलिये शापित होकर निष्क्रिय जीवन जीने के लिये बाध्य हो सकती है क्योंकि

क्रांति राम की

2 नारी सम्मान  उस समय समाज में नारी का स्थान कैस था? मैना के इस कथन से प्रकट होता है। कत बिधि स

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

प्रशिक्षण विश्वामित्र बहुत चिंतित हो उठे थे। ऋषि-मुनियों अर्थात् सभी विचारवान बुद्धिजीविय

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

राम की क्रान्ति 1. भूमिका रामजी को अपनी क्रान्ति रा प्रारम्भ करते समय परिवेश क्या था? एक ओर रा

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

सेना में भर्ती कल्पना करिये देश के चारों ओर के निकटवर्ती देश एक साथ भारत पर हमला बोल दें। भार

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

दो प्रकार की सेना किसी भी देश में दो प्रकार की सेनायें होती है। एक सेना को बनाती है सरकार और दू

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

राम सेना अभिप्राय यह है कि तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि आज का उपेक्षित गरीब समाज, जो छोटे-छोट

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ। बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।। देवताओं को यही र

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

देवताओं की सन्तान रामायण में एक और प्रसंग आता है कि जब राक्षसों का अत्याचार असहनीय हो गया तो

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

राम-भक्ति  रामजी लंका विजय के पूर्व रामेश्वर के शिवलिंग की स्थापना के समय समस्त मुनियों को

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

कंकर-शंकर तुलसीदास जी इस राम कथा की तुलना नर्मदा जी से कर रहे हैं। क्योंकि नर्मदा जी के बारे मे

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।। जो गंगाजल आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य म

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

अखील भारतीय स्वरूप  अपनी विजय का सारा श्रेय इस शिव समाज को ही देने का आदर्श रखा और इतना ही नही

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

शिवलिंग स्थापना  इसका अभिप्राय यह है कि रामकाज में शिव समाज की भूमिका कोई विकल्प नहीं है। इ

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुं मोहि न पाना।। संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मत

व्याख्यान श्री हनुमान चालीसा का

कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में जमरु स

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                       

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

युद्ध-काल अब यदि काल की बात करें तो भी दिखता है कि यही समाज अग्रिम पंक्ति में है। चाहे शान्तिक

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

विषपान अंत में, शिवजी नीलकंठ बने। अपमानों का विषपान किया, किंतु विष रखा केवल कंठ में ही। न नीच

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

गंगा अवरण फिर गंगाजी! कथा यह है कि भागीरथ के निवेदन पर जब गंगाजी ने धरती लोक पर आने की स्वीकृति

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

तीर्थ-यात्रा जरा कल्पना करिये कि हमारे सारे तीर्थ जंगलों में एवं पहाड़ों पर ही क्यों हैं? उनक

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

शान्ति काल तो यह वनवासी समाज कैसा है? तुलसीदास भी कहते हैं कि शिवजी के मस्तक पर चन्द्रमा है तथ

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

वनवासी कौन अर्थात् हम सब छोटे-छोटे गांव में रहने वाले उपेक्षित एवं गरीब समाज ही यहां शिवजी का

भारत माता का कर्ज़

हमें दिलाने आज़ादी  फौलादों ने लड़ी लड़ाई है माओं ने खो दिये अपने बेटे  बहनों ने खोये भाई है

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

3. शिव-समाज तुलसीदास जी शिव जी के उसी समाज का वर्णन शिवजी की वेष-भूषा के माध्यम से करते हैं। शिव

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

गरीबों का सम्मान  इसका अर्थ हुआ कि शिवजी की बारात में सम्मान किसका? गरीब एवं उपेक्षित समाज क

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

नाना बाहन नाना वेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा।। तरह तरह की सवारियों और तरह तरह के वेष वाले अपन

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

2. शिव-बारात बात यह हुई थी कि ज्योंही बारात दरवाजे पर लगी, तो बारात में आगे-आगे कौन थे? समाज का वह व

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

अध्याय-2 1. भूमिका  आपने एक गीत सुना होगा। "राम जी की सेना चली..." यह कोई गीत नहीं है, यह एकल अभीया

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

गायन विधि हनुमान चालीसा गायन के सम्बन्ध में निम्नांकित सूचना का पालन करने से शीघ्र लाभ मिलेगा

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्दय महं डेरा।। एक बार पुनः हनुमान जी से प्रर्थना है कि हे ना

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

उपसंहार पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित ह्दय बसहु सुरभूप।। यहां हनुमान ज

रेलगाड़ी में खाना और बाकमाल गमक

शाम का वक्त था। ‘सोसायटी’ के बच्चे दो–दो, चार–चार के समूह में खड़े थे। यह दरअसल फ्लेट्स का समुच्च

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात तुलसीदास जी क

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

उद्धरेदात्मनात्मनं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।। मनुष्

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

चंच्ञलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।। भावार

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

जै जै जै हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाई।। इस जगृत हनुमान को गुरु स्थान पर प्रतिष्ठित क

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। पहले उल्लेख हो चुका। अतं में पुनः उसका उल्ले

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

और देवता चित्त धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।। कितनी स्पष्ट घोषणा है तुलसी दास जी की। याद आती ह

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                       

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                      त

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। कोई औषिधि, सिद्धि करने के बाद ही रसायन बन पा

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। अष्ट सिद्धियां आध्यात्मिक उन्नति की शिख

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। परित्र

कहाँ चले

कहाँ चले, ठहरो ,पूर्ण नही हैं कार्य तुम्हारे                                      

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

जब जब होई धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।। करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं ब्रिप्र

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्धि जगत उजियारा।। इसका उल्लेख पहले भी आ चुका है। स्थायी आ

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                     और

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                       

राष्ट्रपति चुनाव उर्फ पत्तेबाजी

बड़ी गजब शब्दावली चल रही है इन दिनों। मीडिया में, तमाम नेताओं के बयानों में आगामी राष्ट्रपति के

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

संकट ते हनुमान छुड़ावे। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। अर्थात् वह समाज जो मनसा, वाचा एवं कर्मणा

ईदगाह

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां हिन्दी साहित्य ही नहीं वरन विश्व साहित्य में श्रेष्ठता का मानक हैं

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। सब प्रकार का आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, जेहा

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

यहां पर उल्लेख करना उपयुक्त रहेगा कि रामायण में रामराज्य का उल्लेख इस प्रकार आया है। दैहिक दै

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

                                                                       

काकी और कल्लू

वक्त निकाल कर पढ़ियेगा। चाहें तो लघुकथा कह सकते हैं। ना भी कहें तो नाम की जरूरत नहीं हैं। बस किस

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। भ्रष्टाचार आज कोई आपसे पूछे क्या भ्रष

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

  जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

तब अनुजहि समुझावा रघुपति करुना सींव। भय देखाइ लै आवहु तात सखा सुग्रीव।। हनुमान जी भी सुग्रीव

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

मोरें मन प्रभु अस विस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा।। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

भाग-4 :- व्यवस्था परिवर्तन तुम उपकर सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा।।16।। यह एक बहु

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

भाग-3 आशीर्वाद रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मन प्रिय भरतहि सम भाई।।12।। सहस बदन तुम्हारो जन ग

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

पष्ठ : श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।11।। नगरवासी छठा काम है नगरवासी राम वनवासी हनुमान के लगे लगा र

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

मूर्छित लक्ष्मण राम रावन युद्ध में लक्ष्मण जी दो बार मूर्छित होते हैं एक बार रावण के प्रहार से,

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

कंचन बरन विराज सुबेसा। कान कुण्डल कुंचित केसा।। शरीर स्वर्ण के समान कान्तिमान, आभावान कब बनत

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

पंचम- लाय सजीवन लखन जियाये। लखनलाल उपर्युक्त चारों कामों से तो रामकाज की प्रस्तावना ही बनती

बच्चा और अभिव्यक्ति का बड़प्पन 

बच्चा होनहार है। अभी वह पानी को पप्पा और रोटी को हप्पा कहता है लेकिन गलियां एकदम निर्दोष देता है

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

चतुर्थ - रामचन्द्र के काज संवारे।।10।। रामलाला मन्दिर यहां तुलसीदास जी बिना किसी विशेषण के स

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

तृतीया - भीम रूप धरि असुर संहारे। असुर संहार- असुर अर्थात् समाज द्रोही, जिनके नाम रोज अखबारो

विचारों का शुद्धीकरण करो

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जब तक अपने अत:करण को पाक-पव

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

मोरें हृदय परम संदेहा। सुनि कपि प्रगट कीन्हि निज देगा।। सीता मन भरोस तब भयऊ। पुनि लघु रुप पवन

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

एकल अभियान का कार्य क्या है। इसका उत्तर आगामी तीन चौपाइयों की छः पंक्तियों में वर्णित हैं। हमे

टॉप टॉपर और नाचता हुआ लट्टू

सूरज टॉप पर है। आग बरसाता, सबको अपने तेवर दिखाता। सही मायनों में पूरी कायनात का असली टॉपर वही है

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

      (8) हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी दोहा लिखते हैं-                           &

राम नाम से महक उठता है जीवन

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, एक ऐसी औष

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

(7) हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी दोहा लिखते हैं-                                 

सब परेशानियों से मुक्ति का आधार है राम-नाम

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जीव पर मालिक की रहमत होती है तो जी

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

(6) हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी दोहा लिखते हैं-  संकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग ब

खुशियां पाने के लिए अंत:करण की सफाई जरुरी

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम की महिमा अपरम्पार है और वो जी

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

 हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी दोहा लिखते हैं-                                  

रुंधे रुंधे कण्ठ से कोकिल रोया

रुंधे रुंधे कण्ठ से कोकिल रोया                                                 &

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

       (4) हनुमान चालीसा में प्रवेश करने से पूर्व तुलसीदास जी दोहा लिखते हैं-            &nb

दो बूंद गंगा जल नयनों में भर दे

या तो जीवन जय दे,                                                            

सशंकित इण्डिया का साइलेंट मोड

मेरा प्रदेश वाइब्रेंट होने की जल्दबाजी में हैं। कुछ अन्य राज्य, सुना है, काफी दिनों से विकास की

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान 

(3) हनुमान चालीसा में प्रवेश करने से पूर्व तुलसीदास जी तीसरा दोहा लिखते हैं-                

खुदगर्ज हैं ज्यादातर दुनियावी रिश्ते-नाते    

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, 

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान

(2) हनुमान चालीसा में प्रवेश करने से पूर्व तुलसीदास जी दूसरा दोहा लिखते हैं- बुद्धिहीन तनु जानिक

श्री हनुमान चालीसा का व्याख्यान 

चालीसा के प्रस्ताना के रुप में दो दोहे भी हैं। प्रथम दोहा तो रामचरित मानस के अयोध्याकाण्ड का भी

हमेशा अच्छे लोगों का संग करें

पूज्य पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव सत्संग में चलकर आता

तीन चींटियां

खलील जिब्रान दुनिया के महानतम दार्शनिक, लेखक, विचारक, और चित्रकार में गिने जाते हैं। सीरिया में

देवी

साहित्य समाज का दर्पण होता है। यह कहावत मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में चरितार्थ होती दीखती है।

जन्मों जन्मों की गर्मी दूर कर देता है राम नाम 

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में आने से जन्मों-जन्मों

खुशियों के लिए आत्मविश्वास पैदा करें

पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इंसान इस दुनिया में, खासकर इ

चेहरे जाने अनजाने

रोज न जाने कितने अनजाने चहरे मिलते हैं                         

रिजल्ट के आगे

12वीं के रिजल्ट के बाद विकट रुदनशील माहौल हो लिया है। 12वीं कक्षा में 95 परसेंट लानेवाला भी दुखी है

सत्संग में आने से कटते हैं पाप कर्म

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता

सेवा सुमिरन से साफ होगी पाप कर्मों की धूल

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा का नाम सुखों की

राम नाम की दवाई से ही काबू होगा मन

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इंसान अगर ईश्वर का नाम लेता है, तो

बेटियां ज़िन्दाबाद हैं

कोई पर्दे लगाता है तो उन्हे जला दो। खूंटो में बांध रखा है तो उखाड़ दो उसे। बेड़ियों में जकड़ा है

घड़ी के साथ

सूर्योदय हुआ, पहली चाय ली घड़ी के साथ                          

बुरे विचारों को त्यागकर सेवा-सुमिरन करें

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अपने गंदे, बुरे विचारों से लड़ना स

सत्संग में आने से कटते हैं पाप कर्म 

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता

मेरी प्रसिद्धि से डर गये मोदी

आजकल देश में कुछ भी बड़ा घटित नहीं हो रहा है। हां, छोटी-मोटी घटनायें होती रहती हैं। टीवी पर हल्ला

प्रभु का पैगाम जन-जन तक पहुंचाते हैं संत

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर उन्हें कहा जाता है ज

प्रभु स्मरण ही इन्सान का पहला कर्त्तव्य

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मनुष्य शरीर में प्रभु सिमरन करना

जिसके विचार काबू वही सबसे सुखी

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक ने इन्सान को सर्वश्रेष्ठ,

जीवों का भला करने आते हैं संत

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे, पीर-फकीर परमपिता परमात्मा

कुछ सपने है

कुछ सपने है, जिनकी दास्ता अभी अधूरी है मंजिलों से बस कुछ कदमों की दूरी है। कमद तो थकते नहीं पर फा

राम-नाम ही आत्मबल देने वाली ताकत

गुरू संत डॉ.गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि  इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड,

एक कहानी जीवन की

एक कहानी जीवन की                                  &nbs

सुमिरन से मिलती हैं ढ़ेरों खुशियां

पूज्य पूज्य गुरू संत डॉ.गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की

कभी धूप तो कभी छाव है जिन्दगी

खुशियों की ख्वाब से बनती है जिन्दगी।                         &nbs

हमेशा अच्छे लोगों का संग करें

पूज्य पूज्य गुरू संत डॉ.गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव सत्संग में चलकर आता

बारिश होगी

काला घोर बादल आया है संग अपने बरखा लाया है सारी धरती चहक उठी है              &nb

रामनाम से मृतलोक में भी पा सकते हो बेइंतहा खुशियां

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत जीवों को समझाते हैं कि इन्सा

मालिक का शुक्राना करना कभी ना भूलो

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा हर कण, हर जर्रे

चाह यही बस

चाह यही बस                        स्नेह की छाया बनी रहे चाह यही बस

कलियुग में राम-नाम जपना अति जरूरी

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं  कि जो मालिक की भक्ति-इबादत करते ह

खोजने हैं पुराने सपने

खोजने हैं पुराने वो सपने                               

हमेशा सबका भला मांगते हैं संत

सुख-शांति के लिए समय लगाता है। कोई भी यह सोचकर समय नहीं लगाता कि आने वाले समय में वह दुखी, परेशान

पूस की रात

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां हिन्दी साहित्य ही नहीं वरन विश्व साहित्य में श्रेष्ठता का मानक हैं

बहते जाना है

जीवन को पहचाना मैंने देख नदी की यह धरा इठलाती बलखाती सी बहती रहती यह धरा मार्ग पकड़ कर एक चला-चल

जिसके विचार काबू वही सबसे सुखी

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक ने इन्सान को सर्वश्रेष्ठ,

तुम खुश तो होगे

तुम खुश तो होगे... तुम्हारी रोटियां पक तो जाएंगी                     स

जीवों का भला करने आते हैं संत

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे, पीर-फकीर परमपिता परमात्मा

प्रभु-भक्ति में लोक-लाज न देखो

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में चहुं ओर झूठ का ब

मां तो ममता का सागर है

'मदर्स डे' यानी एक खास दिन मां के नाम यू तो हर दिन मां का होता है। इसे हम किसी एक दिन में समेटकर नही

अपेक्षा और उपेक्षा के बीच

लोकतंत्र की खासियत है कि उसमें कोई ‘ऑनपेपर’ उपेक्षित नहीं रहता। रहता हो तो भी कहलाता नहीं। भले

शोक का शिशु

  शोक के शिशु का जन्मदिवस उत्सव में आयी एक बड़ी हांडी माँ के आचल में छिपी हुयी कुछ दाने सूखे च

माँ की पीड़ा

युगों-युगों से पूजा हमने, जनम-जनम का नाता है। गाय हमारी माता है, जीवन कि भाग्य विधाता है।। वह जन

बाहुबली और राहजन

एक समारोह में जाना हुआ-सारे लोगों को सिर्फ दो हिस्सों में बांटा जा सकता था। एक वो जो बाहुबली 2 देख

गर्मी का मौसम है

मौसम सदा कोई न कोई रिकार्ड तोड़ने की फिराक में रहता है। यह इसका अतिवादी स्वभाव है। शीत ऋतु आती है

ख्वाब ही तो है

शायद आप सो गये हैं मीठे सपनो मे खो गये हैं ... ये ख्वाब भी क्या चीज़ है पानी का बुल-बुला जैसे दरिया क

मेरी अम्मा

फिर वैसा हो जैसा पहले होता था तू मुझे खिलाती तो मैं खेला करता था तू मुझे हंसाती थी हर पल जब भी मै

टर्र-टर्र

इन दिनों विरोध करने की एक नयी-नवेली रीति चल पड़ी है। कहीं-कहीं तो इसका रूप इतना व्यापक है कि यह कि

क्यों भगवान श्री कृष्ण अपने मष्तक पर मोर पंख लगाये रखते है

भगवान श्री कृष्ण का नाम मुंख पर आते ही हमारे आंखों के सामने उनके सुंदर बाल छवि या युवा छवि का चेह

कोई एक खिलौना दे दे

कोई एक खिलौना दे दे। बंदर, भालू, बौना दे दे।। माँ तू मेरी,अच्छी माँ है, फिर से वही विछौना दे दे।।

शराबी की विनम्रता

शराब और शराबबंदी पर हो रही तमाम चर्चाओं के बीच आयोजित निबंध प्रतियोगिता में जिस निबंध को पहला प

हिंदू धर्म में फूल का महत्व

हिंदू धर्म में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि में फूलों का विशेष महत्व है। वैसे तो किस

मानसिक क्षेत्र के ऊपर आध्यात्मिक क्षेत्र है

मनुष्यों का जीवन अत्यंत मूल्यवान है। इतिहास में मानव जीवन के उद्भव के बारे में अनेक वर्णन हैं।

ज्ञान मन को आत्मा के साथ संयुक्त करता है

आध्यात्मिक ज्ञान की अनुभुति बहुत ही सुंदर व गहरा महत्व लिए हुए है परंतु हममें से कितने लोग हैं ज

संकट मोचन नाम तिहारो .......

मंदिरों की नगरी वाराणसी में मंदिर तो गली-गली मिल जाते हैं, लेकिन शहर के कुछ मंदिर ऐसे हैं जिनका म

अध्यात्म एक दर्शन है

मनुष्यों का जीवन अत्यंत मूल्यवान है। इतिहास में मानव जीवन के उद्भव के बारे में अनेक वर्णन हैं।

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