भौम प्रदोष व्रत

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written by : ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन

on: 27-02-2018-11:15:24

ऋण मुक्ति का चमत्कारिक व्रत है, भौम प्रदोष
होती है भगवान शिवजी की आराधना, कटते हैं सारे कष्ट

भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में भगवान शिवजी की महिमा अपरम्पार है। भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो तैंतीस कोटि देवी-देवताओं में देवाधिदेव महादेव की उपमा से अलंकृत हैं। भगवान शिवजी की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए शिवपुराण में विविध व्रतों का उल्लेख मिलता है, जिसमें प्रदोष एवं शिवरात्रि व्रत प्रमुख है। कलियुग में अभीष्ट की पूर्ति के लिए 11 प्रदोष व्रत या वर्ष के समस्त त्रयोदशी तिथियों का व्रत अथवा मनोकामना पूर्ति होने तक प्रदोष व्रत रखने का विधान है। प्रदोष व्रत से दुख-दारिद्रय का नाश होता है। जीवन में सुख-समृद्धि खुशहाली आती है, साथ ही जीवन के समस्त दोषों का शमन भी होता है। प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किये जाने वाला प्रदोष व्रत इस बार 27 फरवरी, मंगलवार को रखा जाएगा। भौम प्रदोष व्रत से ऋण की मुक्ति बताई गई है। ज्योतिषविद् श्री विमल जैन ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 27 फरवरी, मंगलवार को अपराह्र 2 बजकर 39 मिनट पर लगेगी जो कि 28 फरवरी, बुधवार को प्रातः 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। 27 फरवरी, मंगलवार को प्रदोष बेला में त्रयोदशी तिथि का मान रहेगा। जिसके फलस्वरूप प्रदोष व्रत 27 फरवरी, मंगलवार को रखा जाएगा। प्रातःकाल से निराहार व निराजल रहकर सायंकाल प्रदोष बेला में शिवजी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। प्रदोषकाल का समय 2 घड़ी या 3 घड़ी का माना गया है। एक घड़ी का समय 24 मिनट का रहता है। व्रत के दिन व्रतकर्ता को व्यर्थ वार्तालाप एवं परनिन्दा आदि से बचना चाहिए तथा दिन में शयन नहीं करना चाहिए।

प्रदोष व्रत का विधान - 

ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर स्नान-ध्यान, पूजा-अर्चना के पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गन्ध व कुश लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सम्पूर्ण दिन निराहार रहना चाहिए। सायंकाल पुनः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर प्रदोष काल में भगवान शिवजी की विधि-विधान पूर्वक पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान शिवजी की पूजा-अर्चना प्रारम्भ करनी चाहिए। भगवान शिवजी का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्ष, नैवेद्य आदि अर्पित करके धूप-दीप के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। शिवभक्त अपने मस्तिष्क पर भस्म और तिलक लगाकर शिवजी की पूजा-अर्चना करें तो पूजा शीघ्र फलित होती है। परम्परा के अनुसार कहीं-कहीं पर जगतजननी पार्वतीजी की भी पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान् शिवजी की महिमा में प्रदोष स्तोत्र का पाठ एवं स्कन्दपुराण में वर्णित प्रदोष व्रत कथा का पठन या श्रवण अवश्य करना चाहिए। जिससे भगवान शिवजी शीघ्र प्रसन्न होकर मनोरत पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं। यह व्रत महिलाएं एवं पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फलदायी है। इस दिन अपनी दिनचर्या नियमित संयमित रखते हुए भगवान शिवजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। शिवजी की महिमा में रखे जाने वाला प्रदोष व्रत जीवन में समस्त दोषों का शमन करता है। भौम प्रदोष व्रत से ऋण की मुक्ति होती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को दान करना चाहिए, साथ ही गरीबों व असहायों की सेवा व सहायता अवश्य करनी चाहिए। श्रद्धा-भक्तिभाव के साथ किये गए प्रदोष व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि व सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है। 

दिन या वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ - 

ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि प्रत्येक दिन के प्रदोष व्रत का अलग-अलग प्रभाव है। जैसे- रवि प्रदोष - आयु एवं आरोग्य लाभ, सोम प्रदोष - शांति एवं रक्षा, भौम प्रदोष - कर्ज से मुक्ति, बुध प्रदोष - मनोकामना की पूर्ति, गुरु प्रदोष - विजय प्राप्ति, शुक्र प्रदोष - आरोग्य, सौभाग्य एवं मनोकामना की पूर्ति, शनि प्रदोष - पुत्र सुख की प्राप्ति।  

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