क्रांति राम की

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written by : सारथी

on: 12-03-2018-14:44:30

कौन चला रहा है परिवार ? 

एक क्षण के लिये आंख बंद करके सीधे बैठिये तथा अपने मानस चक्षु के सम्मुख परिवार के सब सदस्यों को देखिए और देखते रहिये। देखते-देखते सोचते रहिये कि इस परिवार को कौन चला रहा है? मैं या कोई और? तो ध्यान में आयेगा कि परिवार में घटने वाली घटनाओं में एक भी ऐसा नहीं जिसका कारण हम अपने को समझ सकें। प्रत्येक घटना किसी अन्य शक्ति द्वारा संचालित हो रही है। वह शक्ति कौन है? वह रामजी हैं। परिवार चला रहे हैं रामजी और हम भ्रम पाले हुये है कि परिवार में चला हा हूँ - इसी भ्रम को तो मोह कहते हैं जिसको नष्ट करने के लिए रामायण सन्देश दे रही है?

जब यह सच स्वीकार कर लेते हैं तो एक बार परिवार की सारी चाबियाँ राम जी को सौंप कर निश्चिन्त होकर देखिये कि रामजी जो रामायण कह रहे हैं या कृष्ण जी जो गीता में कह रहे हैं उसकी सच्चाई परखने के लिये एक बार प्रमाणिकता पूर्वक प्रयोग करने में क्या आपत्ति है? यदि समझ में आ जाये तो उस प्रयोग को ही जीवन व्रत बना लेंगे अन्यथा जैसा आज चल रहा है वैसा चलते रहने में तो कोई रोक नहीं रहा है।

अर्थात् रामजी की कृपा पात्र बनने का यही एकमेव मार्ग है। गीताजी में भी यह प्रसंग आता है। जब भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते है कि तुम सब कर्तव्यों को भूल जाओ, केवल मेरी शरण में आओ, मेरा ही काम करो, मैं तुमको सब कष्टों से मुक्त कर दूंगा। सदा मेरा स्मरण करो तो तुम और मैं एक रूप हो जायेंगे।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।

समस्त प्रकार के धर्मों का परित्याग कर और मेरी शरण में आओ। मैं समस्त पापों से तुम्हारा उद्धार कर दूंगा। चिंता मत करो। 

साभार
क्रांति राम की 
व्याख्याकार
श्याम गुप्ता

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